स्मृतियों का आलोक : नन्द किशोर खन्ना को श्रद्धांजलि

21 मार्च 2026 को वरिष्ठ कलाकार, कला समीक्षक एवं शिक्षाविद् नन्द किशोर खन्ना जी की 9वीं पुण्यतिथि एक गहन स्मृति और आत्मीय श्रद्धांजलि का अवसर …

मुगल मिनिएचर्स और यूरोपियन रियलिज्म दोनों से अलग है पटना कलम

पटना म्यूजियम में पिछले दिनों प्रदर्शित हुयी  “पटना कलम” के चित्रों की प्रदर्शनी कला इतिहास की एक महत्वपूर्ण परिघटना को सामने लाने की सार्थक कोशिश …

रेखा, रंग और प्रतिरोध : बीरेश्वर भट्टाचार्य को नमन

श्रद्धांजलि : स्मृतिशेष 22 मार्च दिन रविवार की वह शाम जैसे समय के कैनवास पर अचानक गहरे स्याह रंग की तरह उतर आई। कला समीक्षक …

कलागुरु बीरेश्वर भट्टाचार्य की स्मृति में कला चर्चा एवं शबीह चित्रण

कलागुरु  प्रो.बीरेश्वर भट्टाचार्य के सम्मान में दिनांक 23 एवं 24 मार्च के दो दिवसीय कार्यक्रम की तैयारियां जोर-शोर से चल रही थी I सभी उत्साहित …

दीवारों से दीर्घा तक : स्टेंसिल, स्मृति और राजनीति का पुनर्पाठ

पिछली सदी के सत्तर के दशक की स्मृतियों में लौटें तो चुनाव प्रचार का एक विशिष्ट दृश्य सामने आता है, जब टीन की चादरों पर …

अफगानिस्तान में  मिला हज़ार वर्ष पुराना बौद्ध मठ, पुस्तकालय और कक्ष भी 

अफगानिस्तान के दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र में हाल ही में एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोज सामने आई है। प्रारंभिक सूचनाओं के अनुसार, यहाँ लगभग एक हज़ार वर्ष …

टिकुली पेंटिंग : परंपरा से आधुनिक कला तक की रचनात्मक यात्रा

बिहार में प्रचलित टिकुली पेंटिंग एक ऐसी विशिष्ट लोक–कला परंपरा है, जिसकी जड़ें भारतीय सांस्कृतिक इतिहास में गहराई तक समाई हुई हैं। इसका संबंध केवल …

युद्ध और उन्माद के साये में मनुष्यता की पुकार

प्रो. वी. नागदास की पहचान एक कलागुरु के साथ-साथ वरिष्ठ चित्रकार और छापा कलाकार की है I शायद यही कारण रहा कि ललित कला अकादेमी …

“रचनात्मक माहौल बच्चों की प्रतिभा को देता है नई दिशा” : जय कृष्ण अग्रवाल

लखनऊ, 13 मार्च 2026। एस्थेटिक एंड कल्चरल डेवलपमेंट प्रोग्राम 2025–26 के अंतर्गत लखनऊ पब्लिक वर्ल्ड स्कूल, डीएलएफ ब्रांच और फ्लोरोसेंस आर्ट गैलरी के सहयोग से …