कला में आर्काइव संस्कृति का महत्व : ‘सुखवीर सिंघल डिजिटल आर्काइव’ के बहाने

कला केवल सौन्दर्य की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि समय, समाज, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं का जीवंत दस्तावेज भी होती है। किसी कलाकार की चित्रकृतियाँ, रेखाचित्र, पत्राचार, …

पालकालीन कला-शैली : राहुल सांकृत्यायन द्वारा संगृहीत थंका चित्रों के माध्यम से

काशी प्रसाद जायसवाल शोध संस्थान, पटना द्वारा वर्ष 1986 में एस. के. पाठक के संपादन में प्रकाशित The Album of the Tibetan Art Collections राहुल …

तीन अलग-अलग पीढ़ियों एवं शैलियों के लघुचित्र: एक विवेचना

पाल काल से लेकर पटना कलम तक की कला यात्रा पर एक समीक्षात्मक दृष्टि  यहाँ हमने तीन अलग-अलग कालों में रचे गए लघुचित्रों को आधार …

तुर्गनेव तथा दास्ताव्स्की के कला एवं साहित्य पर नलिन दृष्टि

नलिन विलोचन शर्मा के निबंधों में कला एवं नाट्य समीक्षा से जुड़ी जितनी सामग्री उपलब्ध है, उसके आधार पर कहा जा सकता है कि उन्हें …

जहाँ रंग प्रकाश बन जाते हैं : अफ़ज़ल के चित्र

देवास, मध्यप्रदेश के वरिष्ठ चित्रकार अफ़ज़ल पठान (1936–2000) देश के उन महत्वपूर्ण समकालीन कलाकारों में गिने जाते हैं, जिन्होंने अमूर्त चित्रकला को स्थानीय अनुभव, ग्रामीण …

भारतीय लोक एवं आदिवासी चित्रकला : एक समग्र दस्तावेज़

भारतीय लोक एवं आदिवासी कला के प्रति हमारे कला-जगत और बौद्धिक जगत में दशकों तक अपेक्षित गंभीरता का अभाव क्यों बना रहा, यह प्रश्न आज …

भारतीय मूर्तिकला में ‘ध्यान’ की अभिव्यक्ति

भारतीय प्राचीन कला की चर्चा प्रायः बौद्ध चित्रकला एवं मूर्तिकला के संदर्भ में अधिक होती है, जबकि नलिन विलोचन शर्मा ने अपने अनेक कला-निबंधों में …