औपनिवेशिक कला शिक्षा और भारतीय दृश्य कला : कहानी परंपरा से विच्छेद की

गिरीश कर्नाड ने अपने एक लेख में समकालीन भारतीय कलाओं का विश्लेषण करते हुए उन्हें मोटे तौर पर तीन श्रेणियों में विभाजित किया है। इसके …

भारतीय कला बाज़ार : वर्तमान और संभावनाएं

क्या वैश्विक कला बाज़ार में ‘ओल्ड मास्टर्स’ की वापसी का कोई संकेत भारतीय कला बाज़ार में बंगाल स्कूल के पक्ष में दिखाई देता है, या …

आवरण-सज्जा : नलिन विलोचन शर्मा

नलिन विलोचन शर्मा की यह टिप्पणी केवल एक संपादक की व्यावहारिक चिंता नहीं है, बल्कि उनकी गंभीर कला-दृष्टि और विकसित सौंदर्यबोध का भी परिचायक है। …

‘सिद्धार्थ से बुद्ध’ का सफल मंचन

19 दृश्यों के संगीतमय नाटक ने दर्शकों को किया भावविभोर दिल्ली के सांस्कृतिक केंद्र मंडी हाउस स्थित प्रतिष्ठित श्रीराम सेंटर ऑडिटोरियम में दिल्ली की रंग …

सिनेमाई कैनवास पर होमर का महाकाव्य

क्या क्रिस्टोफर नोलन रच पाएँगे ‘द ओडिसी’ का नया इतिहास? क्रिस्टोफर नोलन की आगामी फिल्म The Odyssey की घोषणा ने विश्वभर के सिनेप्रेमियों के साथ …

कला, समाज और बाज़ार : जरुरत सांस्कृतिक अर्थशास्त्र और समाजशास्त्र की

कला और संस्कृति पर अपने देश में चर्चा तो बहुत होती है, किंतु आश्चर्य की बात है कि कला को समझने के लिए जिन दो …

अच्छी संस्थाएं पवित्र उद्देश्य और समाज के सहयोग से आगे बढ़ती हैं

प्रो. रामसिंह तोमर (1922–2003) प्रख्यात शिक्षाविद, हिंदी के विद्वान, अनुवादक और संस्थान-निर्माता थे। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से डॉ. धीरेन्द्र वर्मा के निर्देशन में पीएच.डी. करने के …

एमिली ईडन और औपनिवेशिक भारत की दृश्य-स्मृतियाँ

जरूरी नहीं कि किसी चित्रकार अथवा उसकी प्रदर्शनी का मूल्यांकन केवल उसकी आधुनिकता, तकनीकी दक्षता या कलात्मक उत्कृष्टता के आधार पर ही किया जाए। कला …

इतिहास, रंगमंच और समकालीनता : दिल्ली में ‘सम्राट अशोक’

नई दिल्ली, 13 जुलाई I  राजधानी के सांस्कृतिक केंद्र मंडी हाउस स्थित श्रीराम सेंटर ऑडिटोरियम में दिल्ली की रंग संस्था बाबू शिवजी राय फाउंडेशन द्वारा …