आनंद कुमारस्वामी : कला, लोक और भारतीयता के सनातन प्रवाह के दार्शनिक

149वीं जयंती पर विशेष स्मरण 22 अगस्त 2026 को भारतीय कला-दर्शन के अप्रतिम व्याख्याकार, महान कला इतिहासकार और सांस्कृतिक मनीषी डॉ. आनंद केंटिश मुथु कुमारस्वामी …

क्या कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बदल जायेगा ललित कला का पाठ्यक्रम?

आज कला-शिक्षा एक ऐसे मोड़ पर आ खड़ा है जहाँ कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल कलाकार के हाथ में आया नया उपकरण मात्र नहीं रह गया है, …

“लेंस में लखनऊ: मेट्रो बनी शहर की जीवंत तस्वीर”

लखनऊ, 19 अगस्त 2026। विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर लखनऊ मेट्रो में विशेष फोटोग्राफी प्रदर्शनी एवं मेट्रो ट्रेन के भीतर फोटोवॉक का आयोजन किया …

औपनिवेशिक छाया से आधुनिक चेतना तक भारतीय उपमहाद्वीप की कला

20वीं सदी का पूर्वाध दक्षिण एशियाई कला इतिहास में एक युगांतरकारी मोड़ लेकर आया। औपनिवेशिक साम्राज्यवाद के पतन और नए राष्ट्रों के अभ्युदय के बीच, …

टाइमलेस इन ब्रॉन्ज (अंतिम भाग)

कांस्य मानव सभ्यता की प्राचीनतम और महत्वपूर्ण कलात्मक धातुओं में से एक है। हड़प्पा सभ्यता की प्रसिद्ध ‘नर्तकी’ से लेकर नालंदा और कुर्किहार की बौद्ध …

“टाइमलेस इन ब्रॉन्ज” 1

बिहार म्यूजियम, पटना में  कांस्य माध्यम से बनी कलाकृतियों की अनूठी प्रदर्शनी आयोजित  कांस्य मानव सभ्यता की सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण कलात्मक धातुओं में से …

ओ. सी. गांगुली : भारतीय कला इतिहास के मौन पुरोधा

भारतीय आधुनिक कला के इतिहास में कुछ ऐसे नाम हैं जिनके बिना इस इतिहास की कल्पना अधूरी है, किंतु विडंबना यह है कि वे स्वयं …

शिवपूजन सहाय का उपन्यास ‘देहाती दुनिया’ बिहार के औपनिवेशिक गाँव का एक सामाजिक-सांस्कृतिक दस्तावेज

पटना, 11 अगस्त। आचार्य शिवपूजन सहाय के उपन्यास ‘देहाती दुनिया’ के प्रकाशन के सौ वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय समारोह संपन्न …