“महाभारत गाथा की जीवंत प्रस्तुति”

  • वास्तुकला एवं योजना संकाय के छात्रों द्वारा महाभारत पर “The Dice of Fate” शीर्षक नाटक की अनोखी प्रस्तुति ।

लखनऊ, 20 सितम्बरI शनिवार को वास्तुकला एवं योजना संकाय, डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय, लखनऊ के छात्रों ने भारतीय महाकाव्य महाभारत पर आधारित एक भव्य नाट्य प्रस्तुति का आयोजन संकाय प्रांगण के ओपन एयर थियेटर में किया, यह प्रस्तुति संकाय के ड्रामा क्लब के साथ आर्ट और मीडिया क्लब के सौजन्य से किया गया। जिसमें छात्रों ने महाभारत की कालजयी कथा को नए दृष्टिकोण और मंचीय प्रयोगों के साथ प्रस्तुत किया।

नाटक में पांडवों और कौरवों की गाथा, धर्म और अधर्म के संघर्ष, तथा जीवन के जटिल प्रश्नों को आधुनिक परिप्रेक्ष्य से दर्शाया गया। मंच सज्जा, परिधान, ध्वनि एवं प्रकाश संयोजन सभी छात्रों की रचनात्मकता और सामूहिक प्रयास का उत्कृष्ट उदाहरण रहे। विशेष आकर्षण रहा वास्तुकला एवं योजना की पृष्ठभूमि से जुड़े अभिनव सेट डिज़ाइन, जिसने मंच को जीवंतता और गहराई प्रदान की। कार्यक्रम में शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं गणमान्य अतिथियों ने उपस्थिति दर्ज की। सभी ने छात्रों की सृजनशीलता, अनुशासन और प्रस्तुति की गंभीरता की सराहना की। यह नाट्य आयोजन न केवल कला और साहित्य के प्रति छात्रों की संवेदनशीलता को दर्शाता है बल्कि उनके समग्र व्यक्तित्व विकास की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

संकाय के छात्रों ने महाभारत की अमर गाथा पर आधारित नाटक “The Dice of Fate” का शानदार मंचन किया। यह प्रस्तुति हस्तिनापुर की द्युतसभा पर केंद्रित थी, जहाँ शकुनि द्वारा फेंके गए पासों ने न केवल पांडव और कौरवों का, बल्कि पूरे कुरुवंश का भाग्य बदल दिया। महाभारत केवल युद्धकथा नहीं, बल्कि जीवन का महाग्रंथ है। इसमें पांडव और कौरवों के संघर्ष के माध्यम से धर्म, नीति और मानव स्वभाव की जटिलताओं का चित्रण किया गया है। युद्धभूमि में अर्जुन के मोहग्रस्त होने पर श्रीकृष्ण द्वारा दिया गया गीता-उपदेश महाभारत का हृदय है, जो निःस्वार्थ कर्म और धर्मपालन का शाश्वत संदेश देता है।

छात्रों द्वारा प्रस्तुत नाटक “The Dice of Fate” इसी निर्णायक घटना—द्युतक्रीड़ा—पर आधारित है, जिसने पूरे कुरुवंश का भाग्य बदल दिया। यह हमें यह शिक्षा देता है कि एक गलत निर्णय न केवल व्यक्ति, बल्कि पूरे समाज को प्रभावित कर सकता है। महाभारत की यह अमर गाथा हमें जीवन का गहन सत्य सिखाती है। इस नाट्य प्रस्तुति से छात्रों ने यह संदेश दिया कि धर्म का पथ कठिन अवश्य है, परंतु उसी पर चलना मानव जीवन का सच्चा लक्ष्य है। जीवन की हर बाधा हमें और मजबूत बनाती है और हमारे निर्णय केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे समाज और भविष्य का मार्ग तय करते हैं। यही महाभारत का शाश्वत संदेश है, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना हजारों वर्ष पूर्व था।

इस अवसर पर संकायाध्यक्ष ने कहा कि “महाभारत केवल एक कथा नहीं, बल्कि जीवन का दर्शन है। हमारे छात्रों ने इसे जिस नवीनता और गहराई से मंचित किया, वह प्रेरणादायी है।” विशेष निर्देशन गिरीश पांडेय ने किया। जिसमें छात्रों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस नाटक का निर्देशन -देव मोहिनी दत्ता, लेखन- अब्दुल कलाम, म्यूजिक – अनुज्ञा , उत्कर्ष और कात्यायनी और वेशभूषा- जानवी सिंह द्वारा किया गया। मंच सज्जा मॉडल क्लब और आर्ट क्लब द्वारा किया गया। पात्रों में युधिष्ठिर- अमूल, भीम- हंसज, अर्जुन- शौर्य सक्सेना, सहदेव- ऋतिक, नकुल- शौर्य वर्मा, कर्ण- विदित, दुर्योधन- वंश, दु:शासन- अभिषेक, धृतराष्ट्र- आशुमेंद्र, विदुर- पेशल, कृष्ण- आदित्य श्रीवास्तव,शकुनि-आदित्य टंडन, यक्ष- स्पर्श, अभिमन्यु- स्पर्श, धृष्टद्युम्न – सचिन, जयद्रथ- अमरेश, द्रुपद- अंकित, द्रौपदी- सृष्टि थे। कार्यक्रम में संकाय के प्राध्यापक गिरीश पांडेय,ताबिश अब्दुल्ला, भूपेंद्र कुमार अस्थाना, लक्ष्मी कांत मिश्रा, अंजनेय शर्मा, रमेश पांडेय सहित बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।

– भूपेंद्र कुमार अस्थाना

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