अमरेश कुमार और सीमा कोहली की रेट्रोस्पेक्टिव प्रदर्शनी बिहार म्यूजियम में

पटना, 7 मार्च। बिहार म्यूजियम, पटना में दिनांक 9 मार्च से देश के दो चर्चित समकालीन कलाकारों श्रीमती सीमा कोहली और प्रो. अमरेश कुमार की रेट्रोस्पेक्टिव प्रदर्शनी की शुरुआत होने जा रही है। प्रदर्शनी का उद्घाटन बिहार म्यूजियम के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह के कर कमलों से शनिवार, 9 मार्च को सायं 5 बजे किया जायेगा। आयोजित प्रदर्शनियों में सीमा कोहली की प्रदर्शनी का शीर्षक है “सीमा कोहली : बिटवीन रियलम्स एंड ड्रीम्स अलोंग रियलिटीज एज़ ” वहीँ मूर्तिकार अमरेश कुमार की प्रदर्शनी का शीर्षक है “मोक्ष”। आज आयोजित प्रेस वार्ता में विशेष जानकारी देते हुए संग्रहालय के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह ने बताया कि देश के इन दो चर्चित समकालीन कलाकारों की यह प्रदर्शनी 31 मार्च तक जारी रहेगी।

श्री सिंह ने कहा कि सीमा कोहली द्वारा प्रदर्शित कलाकृतियां उनके कला के प्रति समर्पण एवं उनके बहु-विषयक अभिव्यक्ति को परिभाषित करती है। तीन दशकों से अधिक के अभ्यास के साथ एक स्व-प्रशिक्षित कलाकार, कोहली अपनी कलाकृतियों में पौराणिक आख्यानों, दर्शन, प्रतिमा विज्ञानं और साहित्य से प्रेरणा ग्रहण करते हुए खोयी हुयी स्त्री कथा को पुनर्व्यख्यायित करती है। सीमा की कलाकृतियों के केंद्र में स्त्री सौंदर्य, कामुकता और आध्यात्मिकता से संबंधित विषय समाहित हैं, जो स्त्री को शक्ति और अस्तित्व के अंतिम स्रोत के तौर पर रूपायित करती है। भारत में महिलाओं के प्रति बरते जाने वाले अन्याय के बारे में बढ़ती जागरूकता के समय में, उन्हें महिलाओं के जटिल और अवास्तविक चित्रणों के लिए जाना जाता है, जो साहसपूर्वक स्त्री विषयकता का दावा करते हैं। सीमा की प्रत्येक कलाकृति में मिथकों, आध्यात्मिकता और दर्शन की बहु स्तरीय कहानियां शामिल हैं। उनकी विचारोत्तेजक कलाकृतियां मिथक और वास्तविकता, आध्यात्मिक और सांसारिक, और स्वयं एवं अन्य के बीच की विभाजक रेखाओं को धुंधला करती हैं।

प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए अंजनी सिंह ने प्रो. अमरेश कुमार के बारे में बताया कि, वे एक ऐसे चर्चित मूर्तिकार हैं जिन्होंने विगत चार दशकों में अपनी कला सक्रियता से राष्ट्रीय स्तर पर बिहार की समकालीन मूर्तिकला को एक विशेष पहचान दिलाई है। अमरेश अपनी अभिव्यक्ति के माध्यम के तौर पर पत्थर, टेराकोटा, धातु और फाइबर समेत सभी प्रचलित सामग्रियों को अपनाते हैं। वे इन दिनों बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के कला संकाय से बतौर प्राध्यापक जुड़े हैं। बिहार म्यूजियम में उनकी यह रेट्रोस्पेक्टिव प्रदर्शनी एक महत्वपूर्ण परिघटना के तौर पर कला प्रेमियों के समक्ष उपस्थित है। जिसका एक सिरा मौर्ययुगीन मूर्तिकला परम्परा से जुड़ता है, जो एक तरह से वर्तमान बिहार के मूर्तिकला का सर्वथा गौरवमयी और आरंभिक इतिहास है। इस तरह से देखा जाए तो यह प्रदर्शनी लगभग दो हजार वर्ष पूर्व के इतिहास का ऐसा पुनः प्रस्तुतिकरण है, जिसमें समकालीन मूर्तिकला और प्राचीन परम्परा का एकीकरण भी समाहित है। इस प्रदर्शनी का शीर्षक है मोक्ष। हम जानते हैं कि मोक्ष एक ऐसा दार्शनिक शब्द है जो भारतीय उप महाद्वीप में प्रचलित हिन्दू, बौद्ध तथा जैन धर्मों में प्रमुखता से आता है जिसका अर्थ है मोह का क्षय होना। हमारे शास्त्रकारों ने जीवन के जो चार उद्देश्य बतलाये हैं—वे हैं धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। इनमें से मोक्ष को परम अभीष्ट अथवा ‘परम पुरूषार्थ’ कहा गया है। मोक्ष की प्राप्ति का उपाय आत्मतत्व या ब्रह्मतत्व का साक्षात् बतलाया गया है।

ऐसे में जब कोई कलाकार अपनी प्रदर्शनी का शीर्षक “मोक्ष” रखता है तो यहाँ एक स्वाभाविक सा सवाल बनता है कि मोक्ष की उपरोक्त व्याख्याओं के आधार पर क्या हम किसी मूर्तिकला प्रदर्शनी को मोक्ष मान सकते हैं या मानना चाहिए। तो इसका उत्तर है कि हाँ माना जा सकता है या माना ही जाना चाहिए। क्योंकि मोक्ष प्राप्ति की विभिन्न अवधारणाओं में एक अवधारणा ऐसी भी है, जिसके तहत आत्म साक्षात्कार को ही मोक्ष माना गया है। वहीँ वेदान्त में पूर्ण आत्मज्ञान द्वारा मायासम्बन्ध से रहित होकर अपने शुद्ध ब्रह्मस्वरूप का बोध प्राप्त करना ही मोक्ष है। देखा जाए तो यह प्रदर्शनी पूरी तरह से मूर्तिकार अमरेश कुमार के उन आत्म साक्षात्कारों की परिणति है, जिससे वे समय-समय पर गुजरते रहे हैं।

हमें उम्मीद है कि उपरोक्त दोनों प्रदर्शनियां आमजनों से लेकर कलाविदों, पुराविदों और कलाकारों को प्रभावित कर पाएंगी। यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि विगत वर्षों में बिहार म्यूजियम, पटना द्वारा नियमित तौर पर देश के महत्वपूर्ण समकालीन कलाकारों की जो प्रदर्शनियां आयोजित की गयीं हैं, वे बेहद सफल रहने के साथ-साथ राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित और प्रशंसित रहे हैं। हमारा प्रयास है कि भविष्य में भी यह सिलसिला जारी रहे, साथ ही आम जनों से लेकर प्रबुद्ध जनों का सहयोग और समर्थन भी मिलता रहे। हमारे इस अभियान में समाचार और संचार माध्यमों के आप सभी मित्रों की सराहनीय भूमिका के हम विशेष आभारी हैं।

स्रोत: प्रेस विज्ञप्ति

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