“नन्हें हाथ, बड़ी रचनाएँ”

  • क्ले मॉडलिंग कार्यशाला का शुभारंभ 
  • मिट्टी के माध्यम से बच्चे सीख रहे हैं सृजन की कला

लखनऊ, 9 मार्च 2026। एस्थेटिक एंड कल्चरल डेवलपमेंट प्रोग्राम 2025–26 के अंतर्गत लखनऊ पब्लिक वर्ल्ड स्कूल द्वारा फ्लोरेसेंस आर्ट गैलरी के सहयोग से “नन्हें हाथ, बड़ी रचनाएँ” शीर्षक से एक रचनात्मक क्ले मॉडलिंग कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। यह कार्यशाला 13 मार्च तक आयोजित की जाएगी। कार्यशाला का उद्देश्य छोटे विद्यार्थियों में मिट्टी जैसे अभिव्यक्तिपूर्ण माध्यम के माध्यम से रचनात्मकता, कल्पनाशीलता तथा स्पर्श-आधारित सीखने की प्रक्रिया को विकसित करना है।

इस अवसर पर कलाकार भूपेंद्र कुमार अस्थाना ‘गेस्ट ऑफ द डे’ के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उन्हें हाथों के माध्यम से कला द्वारा अपनी कल्पनाओं को अभिव्यक्त करने के लिए प्रेरित किया। उनकी उपस्थिति से बच्चों में उत्साह बढ़ा और उन्होंने साधारण मिट्टी को भी कल्पनाशील तथा अर्थपूर्ण आकृतियों में ढालने का प्रयास किया।

भूपेन्द्र कुमार अस्थाना

अस्थाना ने कहा कि मिट्टी केवल एक साधारण पदार्थ नहीं है, बल्कि यह सृजन, संवेदना और कल्पना की अनंत संभावनाओं का माध्यम है। क्ले वर्कशॉप जैसे रचनात्मक आयोजन प्रतिभागियों को अपनी कल्पनाओं और भावनाओं को आकार देने का एक सुंदर अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि मिट्टी के साथ काम करना हमें धैर्य, एकाग्रता और प्रकृति से जुड़ने की प्रेरणा देता है। जब कलाकार अपने हाथों से मिट्टी को गढ़ता है, तो वह केवल एक आकृति नहीं बनाता, बल्कि उसमें अपनी संवेदनाएँ, अनुभव और रचनात्मकता भी अभिव्यक्त करता है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस क्ले वर्कशॉप के माध्यम से प्रतिभागियों को न केवल नई तकनीकों को सीखने का अवसर मिलेगा, बल्कि वे कला के प्रति अपनी समझ और संवेदनशीलता को भी और गहराई से विकसित कर सकेंगे। साथ ही उन्होंने इस आयोजन से जुड़े सभी आयोजकों, कलाकारों और प्रतिभागियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए आशा व्यक्त की कि यह कार्यशाला सभी के लिए प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक सिद्ध होगी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्यालय की प्राचार्या नवनीत कौर ने बच्चों को कला के मूल माध्यमों, विशेषकर मिट्टी, से परिचित कराने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब बच्चे मिट्टी के साथ काम करते हैं, तो वे एक प्राकृतिक माध्यम के साथ सीधे जुड़ते हैं, जिससे उनमें संवेदनात्मक जागरूकता, रचनात्मकता और अपने विचारों को दृश्य रूप में व्यक्त करने का आत्मविश्वास विकसित होता है।

फ्लोरेसेंस आर्ट गैलरी की निदेशक नेहा सिंह ने बच्चों के उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि कला शिक्षा को प्रारंभिक स्तर पर प्रोत्साहित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि क्ले मॉडलिंग कला की सबसे मूलभूत प्रक्रियाओं में से एक है, जिसके माध्यम से बच्चे धैर्य, कल्पनाशीलता और अपने हाथों से कुछ नया बनाने की खुशी का अनुभव करते हैं। साथ ही उन्होंने विद्यालय के साथ इस रचनात्मक पहल में सहयोग करने पर प्रसन्नता व्यक्त की।

इस छह दिवसीय कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ अंशु सक्सेना विद्यार्थियों का मार्गदर्शन कर रही हैं, जिनके निर्देशन में प्रतिभागी क्ले मॉडलिंग की विभिन्न तकनीकों और रचनात्मक संभावनाओं से परिचित होंगे।

इस अवसर पर वरिष्ठ कला विभागाध्यक्ष राजेश कुमार ने भी अपने वक्तव्य में विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए इस कार्यशाला की सराहना की और सभी प्रतिभागियों को अपनी रचनात्मकता को आगे बढ़ाने के लिए शुभकामनाएँ दीं।

कार्यशाला के शुभारंभ के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक विभिन्न आकृतियाँ—जैसे जानवर, वस्तुएँ और कल्पनात्मक मूर्तियाँ—तैयार करना शुरू किया, जो यह दर्शाती हैं कि छोटे-छोटे हाथ भी बड़ी कलात्मक अभिव्यक्तियाँ रच सकते हैं। यह गतिविधि बच्चों के लिए आनंददायक सीखने का अनुभव बनेगी और कला तथा पारंपरिक शिल्प के प्रति उनके जुड़ाव को और अधिक सुदृढ़ करेगी।

स्रोत : प्रेस विज्ञप्ति 

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