जलम फेस्टिवल में उमड़े कलाप्रेमी

  • रामचंद्रन के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर आधारित दो पुस्तकों का विमोचन।
  •  देशभर से आए 240 कला विद्यार्थियों के द्वारा कला प्रदर्शन।
  • समारोह में शामिल  25 विशिष्ट कलाकारों का सम्मान।
  • ज्योति चौधरी का नल तरंग वादन और गायिका कलापिनी कोमकली के सुरों से गूंजी शाम।

जबलपुर, 27 दिसंबर 2024 I जलम का मुख्य उद्देश्य है कि शहर में कला,साहित्य और संगीत के तमाम विधाओं से लोगों को जोड़ना और उन्हें इसकी महत्ता से अवगत कराना। संस्कार के इसी उद्देश्य के साथ हर वर्ष की भांति इस वर्ष जलम के नौवें संस्करण का आयोजन कल्चरल स्ट्रीट के संस्कृति थिएटर में किया जा रहा है।

विदित हो कि जबलपुर शहर को संस्कारधानी के रूप में भी जाना जाता है। इस वर्ष जलम के इस आयोजन के केंद्र में प्रख्यात कलाकार ए. रामचंद्रन हैं। अतः सभी कार्यक्रम रामचंद्रन को ही केंद्रित करते हुए आयोजित किया गया है। जलम फेस्टिवल के मीडिया प्रभारी भूपेन्द्र अस्थाना ने बताया कि आयोजन के दूसरे दिन देश के अनेक प्रांतों से आये अतिथियों को जबलपुर के प्रसिद्ध स्थल धुआंधार, भेड़ाघाट जैसे रमणीय पर्यटन स्थल ले जाया गया।

उसके बाद नगर के कल्चर स्ट्रीट में आयोजन स्थल पर बहुरूपी ऑडिटोरियम में शांतिनिकेतन से आए कुमार जसाकीया द्वारा ए. रामचंद्रन पर एक स्लाइड शो “ए. रामचंद्रन: पुनरावलोकन” प्रस्तुत किया गया। इस स्लाइड शो में जसाकिया ने रामचंद्रन के कलाकृतियों पर विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान रामचंद्रन की कलाकृतियों के मुख्य बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की। उसके बाद ए. रामचंद्रन पर केन्द्रित दो पुस्तकों का विमोचन किया गया। जिसमे से पहली पुस्तक है हिंदी में ‘ए. रामचंद्रन’ जिसके लेखक प्रसिद्ध कला आलोचक विनोद भारद्वाज हैं। यह पुस्तक रबीन्द्र नाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल  द्वारा प्रकाशित की गई है। पुस्तक विमोचन के दौरान नई दिल्ली से लेखक विनोद भारद्वाज, भोपाल से डॉ. अर्जुन सिंह भी मौजूद रहे।

वरिष्ठ कला समीक्षक विनोद भारद्वाज को सम्मानित करते सुप्रिया एवं विनय अम्बर

वहीँ दूसरी पुस्तक “ए. रामचंद्रन – अंडर स्टोरीज बिहाइंड लोटस पोंड” जो अंग्रेजी भाषा में है। यह इत्यादि संस्था द्वारा प्रकाशित की गई है। इस पुस्तक की लेखिका डॉ. सुप्रिया अंबर और संपादक जोनी एम. एल. (प्रसिद्ध कला समीक्षक, क्यूरेटर) हैं। इसके बाद विषय “जबलपुर का पुरातात्विक स्वरूप” पर बातचीत और प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम हुआ। जिसपर मुख्य वक्ता डॉ. शिवाकांत वाजपेयी ने पुरातत्व के अनेक महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा डॉ. हिमांशु श्रीवास्तव के साथ की। साथ ही दर्शकों ने पुरातत्व से जुड़े अनेक प्रश्न वाजपेयी से पूछे जिसका उत्तर उन्होंने दिया।

कार्यक्रम के अगले सत्र में कला के अनेक छात्रों के लिए जलम सृजन कार्यशाला टेराकोटा एवं कैनवस माध्यम में अयोजित किया गया। इस कार्यशाला में अनेक स्थानों से आए बड़ी संख्या में कला के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।

कार्यक्रम के अगली कड़ी में राष्ट्रीय कला शिविर में देश भर से आए 25 कलाकारों को सम्मानित भी किया गया। इसी सम्मान समारोह की कड़ी में “श्री ब्रह्मस्वरूप केला स्मृति इत्यादि सम्मान” से सुश्री ज्योति चौधरी को सम्मानित किया गया। अंत में सांस्कृतिक कार्यक्रम में नलतरंग वादन में वादिका सुश्री ज्योति चौधरी एवम मैहर समूह द्वारा संगीत कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया I साथ ही गायिका कलापिनी कोमकली एवं संगतकार देवास द्वारा शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति हुई।

– भूपेन्द्र कुमार अस्थाना – मीडिया प्रभारी

9452128267,7011181273

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