फॉर द टाइम बीइंग: कोच्चि-मुज़िरिस बिएनाले 2025

विशेष आलेख | सुमन कुमार सिंह

भारत और दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा समकालीन कला आयोजन, कोच्चि-मुज़िरिस बिएनाले (Kochi-Muziris Biennale), अपने छठे संस्करण के साथ एक बार फिर कलाजगत में एक जीवंत हस्तक्षेप करने जा रहा है। 12 दिसंबर 2025 से 31 मार्च 2026 तक चलने वाले इस 110-दिवसीय महोत्सव का शीर्षक है — “For the Time Being” (फिलहाल के लिए)।

इस संस्करण के क्यूरेशन का दायित्व, बहुआयामी प्रदर्शनकारी कलाकार निखिल चोपड़ा और गोवा-स्थित HH आर्ट स्पेसेज़ ने साझा रूप से निभा रहे हैं । चोपड़ा का दृष्टिकोण समकालीन क्यूरेटरशिप को एक नई अर्थवत्ता और संवेदनशीलता प्रदान करता है, जो न केवल “कला-प्रदर्शन” को पुनर्परिभाषित करता है, बल्कि इसे एक जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र (living ecosystem) में रूपांतरित करता है।

क्यूरेटर का दृष्टिकोण: ‘दोस्ती की अर्थव्यवस्था’ और ‘शरीर की स्मृति’:

निखिल चोपड़ा

निखिल चोपड़ा की क्यूरेटोरियल टिप्पणी इस बात की पुष्टि करती है कि यह बिएनाले पारंपरिक “मुख्य प्रदर्शनी” के ढांचे से इतर हटकर प्रक्रिया को पद्धति और कलाकारों के बीच के सहभाव, मित्रता और संवाद को केन्द्र में रखता है। यह प्रदर्शनी स्थिरता से दूर, एक प्रवाहमान, उत्तरदायी और जीवंत आयोजन के रूप में रची गई है।

चोपड़ा के अनुसार, यह आयोजन एक “जीवित पारिस्थितिकी” की तरह है जिसमें हर घटक—प्रदर्शन, सहभागिता, श्रम, स्मृति और उपस्थिति—एक-दूसरे के साथ संवाद में विकसित होता है। शरीर को वह एक समयात्मक भू-दृश्य (temporal landscape) के रूप में देखते हैं — एक ऐसा माध्यम जो श्रम, पीड़ा, प्रेम, और स्मृति को वहन करता है।

कार्यक्रम के विविध आयाम: शिक्षा, सहभागिता और बच्चों की कला :

केवल अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी ही नहीं, बिएनाले 2025 में कला संवाद, कार्यशालाएं, परफॉर्मेंस, फिल्म स्क्रीनिंग, और रेज़ीडेंसी प्रोग्राम जैसे बहुआयामी आयोजन भी शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त Students’ Biennale, Art by Children, Invitations, और Collateral Events जैसे खंड भी दर्शकों को समकालीन कला के विविध और अनछुए आयामों से जोड़ेंगे।

कोच्चि की ऐतिहासिकता और बिएनाले की सांस्कृतिक जिम्मेदारी :

कोच्चि, एक ऐतिहासिक बंदरगाह शहर है, जिसने प्राचीन काल में दुनिया के कई भागों को व्यापार के माध्यम से जोड़ा। उसी शहर की सांस्कृतिक-राजनीतिक-सामाजिक परतों को यह बिएनाले समकालीन कलाओं के ज़रिए पुनर्पाठ करता है। क्यूरेटर स्पष्ट करते हैं कि यह आयोजन एक भव्य दृश्य-प्रदर्शन मात्र नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और देखभाल के भाव से प्रेरित एक सांस्कृतिक साक्षात्कार है।

कला संवाद और सहभागिता: केवल देखने नहीं, साथ जीने का अनुभव :

बिएनाले के इस संस्करण की एक प्रमुख विशेषता है — “लाइवनेस”। यानी प्रदर्शनी केवल चित्र या वस्तुएँ नहीं, बल्कि प्रदर्शन, क्रिया और संवादों के ज़रिए दर्शकों को सहभागी बनने का अवसर देती है। स्थायित्व और परिवर्तन के बीच, दर्शक और कलाकार के बीच, यह आयोजन साक्षीभाव और सक्रियता दोनों को आमंत्रित करता है।

कोच्चि बिएनाले फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. वेणु वी. ने इस आयोजन को “कलात्मक विवेक और संगठनात्मक दक्षता का संगम” बताया। वहीं, को-फाउंडर और प्रेसिडेंट बोस कृष्णमाचारी ने कहा कि निखिल चोपड़ा के निर्देशन में यह बिएनाले स्थायीत्व और जीवंतता के बीच एक नया सेतु निर्मित करेगा।
कोच्चि-मुज़िरिस बिएनाले का छठा संस्करण सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि समकालीन कलाओं की संवेदनशील और विचारशील प्रस्तुति का एक जीवंत मंच है। यह उस दौर में हो रहा है जब युद्ध, महामारी, और डिजिटल अतिरेक ने हमारी संवेदनाओं को कुंद कर दिया है। ऐसे में यह बिएनाले हमें यह याद दिलाता है कि कला न केवल देखने की, बल्कि “होने” की भी प्रक्रिया है।
कलाकारों की पूरी सूची अक्टूबर 2025 में घोषित की जाएगी। उम्मीद  है कि यह आयोजन केवल एक प्रदर्शनी नहीं बल्कि एक अनुभव, एक संवाद, और एक यात्रा साबित होगी — समय और संवेदना के बीच।

स्रोत_प्रेस विज्ञप्ति 

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