कलागुरु बीरेश्वर भट्टाचार्य की स्मृति में कला चर्चा एवं शबीह चित्रण

कलागुरु  प्रो.बीरेश्वर भट्टाचार्य के सम्मान में दिनांक 23 एवं 24 मार्च के दो दिवसीय कार्यक्रम की तैयारियां जोर-शोर से चल रही थी I सभी उत्साहित थे  कि इसके तहत 24 मार्च को गुरुदेव पर केन्द्रित मोनोग्राफ और पुस्तक का विमोचन होने जा रहा है I इसी के तहत आज दिनांक 23 मार्च को कला एवं शिल्प महाविद्यालय, पटना परिसर में “भारतीय कला में आधुनिकता” विषयक संगोष्ठी-वक्ता: श्री अशोक भौमिक एवं कला महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा पोर्ट्रेट पेंटिंग की कार्यशाला आयोजित होनी थी I किन्तु दुर्भाग्य से कल यानी 22 मार्च के संध्या 3.35 पर गुरुदेव इस असार संसार को छोड़कर ब्रह्मलीन हो गए I कला जगत के लिए यह एक ऐसा आघात था जिसकी क्षतिपूर्ति किसी तरह से संभव नहीं है I ऐसे में यह तय हुआ कि पूर्व घोषित कार्यक्रम को यथावत रखा जाए I इसके तहत सुबह 11:30 बजे से कला एवं शिल्प महाविद्यालय, पटना विश्वविद्यालय, पटना में कार्यक्रम का आयोजन किया गया I जिसमें बड़ी संख्या में महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं समेत अनेक गणमान्य जनों की उपस्थिति रही I

बाएं से श्री अशोक भौमिक, पद्मश्री प्रो. श्याम शर्मा एवं विनय कुमार

कार्यक्रम की शुरुआत में पूर्व प्राध्यापक श्री वीरेश्वर भट्टाचार्य जी को पुष्प अर्पित कर कला एवं शिल्प महाविद्यालय पटना, बिहार संग्रहालय पटना, टैगोर कला केंद्र, रबिन्द्र नाथ टैगोर विश्वविद्यालय भोपाल एवं टैगोर स्कूल ऑफ फाइन आर्ट्स एवं परफॉर्मिंग आर्ट्स भोपाल की ओर से पुष्पांजलि अर्पित किया गया। ग़ौरतलब है कि बिहार में आधुनिक एवं समकालीन कला के विकास में प्रो. बीरेश्वर भट्टाचार्य का अभूतपूर्व योगदान रहा है। एक कुशल प्राध्यापक और अपनी कलात्मक अभिव्यक्ति के प्रति सचेष्ट भट्टाचार्य सर आजीवन अपने छात्रों के मार्गदर्शक बने रहे I

डॉ. राखी कुमारी, प्रिंसिपल कॉलेज ऑफ आर्ट एंड क्राफ्ट, पटना विश्वविद्यालय पटना ने वरिष्ठ कलाकार एवं कला समीक्षक श्री अशोक भौमिक, श्री सुमन कुमार सिंह, सुश्री मैत्रेयी, श्री बिपिन कुमार, श्री सुनील कुमार, डॉ. अजय कुमार पांडेय, डॉ अर्जुन कुमार सिंह सहित उपस्थित सभी कला शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का स्वागत किया।

डॉ. अर्जुन कुमार सिंह

तत्पश्चात  श्री भौमिक ने अपने पावर पॉइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से यह स्थापित किया कि रविन्द्रनाथ टैगोर और अमृता शेरगिल ने भारतीय कला में आधुनिकता की नींव रखी। उन्होंने चित्रकला को धर्म सत्ता एवं राज सत्ता के संदर्भ से मुक्त किया। और कला को आम जन की आशा, आकांक्षा और जीवन से जोड़ दिया। सही अर्थों में टैगोर और शेरगिल ने आम जन की छवियों को अपनी अभिव्सेयक्ति से जोड़ा। साथ ही कला को पौराणिक आख्यानों से मुक्त कर प्रयोगधर्मिता को  प्रोत्साहित किया।

श्री भौमिक की चर्चा पर टिप्पणी करते हुए श्री विनय कुमार, निदेशक, बापू टावर ने श्री भौमिक की प्रस्थापना को प्रासंगिक बताते हुए उसमें तकनीकी पक्षों पर और विस्तार देने का आग्रह किया। पद्मश्री श्याम शर्मा ने टैगोर की कला को बहुत महत्वपूर्ण बताया और कहा कि टैगोर ने बहुत स्वतंत्र तौर पर अपनी कला को विकसित किया और उनपर किसी संस्कृति का दबाव नहीं दिखता। श्री अनीश अंकुर जी ने कहा कि आज हमारी कलाकारों पर धर्मसत्ता और राजसत्ता का जोर बढ़ता जा रहा है, जिससे मुक्त होकर हमें कला कर्म करने की जरूरत है।

श्री सुमन कुमार ने कहा कि कला एवं शिल्प महाविद्यालय पटना के लिए बहुत जरूरी है कि इस प्रकार के विचार विमर्श होते रहे। अपने गुरु प्रो. बीरेश्वर भट्टाचार्य को याद करते हुए उन्होंने उनके योगदान को बिहार के संदर्भ में रेखांकित किया। कला एवं शिल्प महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. राखी ने भौमिक के व्याख्यान को प्रेरणास्पद बनाया और छात्रों को उसका अनुसरण करने के लिए प्रेरित किया।

अनीश अंकुर एवं डॉ. अजय कुमार पाण्डेय

टैगोर स्कूल ऑफ़ फाइन एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स SGSU के हेड ऑफ स्कूल, डॉ अर्जुन कुमार सिंह ने इस कार्यक्रम का संचालन किया, और डॉ अजय कुमार पांडेय, पूर्व प्राचार्य, कला एवं शिल्प महाविद्यालय पटना ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए श्री भौमिक के योगदान को रेखांकित किया और छात्रों को उसे प्रेरणा ग्रहण करने का आह्वान किया।

डॉ. राखी कुमार

दूसरे सत्र में पोर्ट्रेट पेंटिंग कार्यशाला में कला एवं शिल्प महाविद्यालय के छात्रों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और मॉडल स्टडी के माध्यम से लाइव पोर्ट्रेट बनाएं। इस सत्र का नेतृत्व कला एवं शिल्प महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. राखी कुमार और डॉ. अर्जुन कुमार सिंह, हेड ऑफ स्कूल, टैगोर स्कूल ऑफ आर्ट एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स ने किया।

ग़ौरतलब है कि रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय और कला एवं शिल्प महाविद्यालय, पटना विश्वविद्यालय के बीच MOU भी है उसे और भी आगे बढ़ाने पर सहमति बनी जिसके तहत आगामी दिनों में और भी कार्यक्रम होने की संभावना है। कार्यक्रम के अंत में प्रो. बीरेश्वर भट्टाचार्य की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर आगत अतिथियों, प्राध्यापकों और छात्रों ने उनके योगदान का स्मरण किया I साथ ही दो मिनट का मौन रखकर गुरुदेव को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की I

स्रोत :प्रेस विज्ञप्ति

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