कम रेखाओं से सशक्त अभिव्यक्ति देनेवाले माधव बाजपेई  

  • जन्मदिन पर विशेष

कार्टून और कैरिकेचर के जरिये बड़े ही शालीनता के साथ गंभीर से गंभीर विषयों पर हम अपनी बात आसानी से कह सकते हैं। जाहिर है यह अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम है। जो पाठक के मन को लुभाते और गुदगुदाते हुए सचेत भी करते हैं। यह कार्टून और कैरिकेचर की सबसे  बड़ी शक्ति है। आवश्यकता है इस कला को और प्रोत्साहन और इसके लिए लोगों को जागरूक करने की । लेकिन दुर्भाग्य से विगत वर्षों में अख़बारों से लेकर पत्रिकाओं में भी इसके लिए स्थान सीमित होता चला जा रहा है ।

बाएं से भूपेन्द्र अस्थाना एवं माधव वाजपेई

दरअसल कार्टून कला, दृश्य कला का वह रूप है जो हास्य या व्यंग्यात्मक विषयों पर केंद्रित होता है। यह अक्सर चित्रों या “कार्टूनों” के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जिनमें लोगों, जानवरों या वस्तुओं को अतिरंजित या विकृत रूप में दिखाया जा सकता है। कार्टूनों का उपयोग राजनीतिक और सामाजिक आलोचना, विज्ञापन, और मनोरंजन के लिए किया जाता है।

कार्टून कला के विभिन्न रूप हैं:

राजनीतिक कार्टून: राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर व्यंग्य करते हैं।

कॉमिक स्ट्रिप्स: कहानियों को एक क्रम में पेश करते हैं।

एनिमेटेड कार्टून: जीवित पात्रों और कहानियों को दर्शाते हैं।

सिंगल-पैनल कार्टून: एक ही चित्र में हास्यपूर्ण दृश्य प्रस्तुत करते हैं।

कार्टून कला में अक्सर सरल, मोटी रेखाओं और जीवंत रंगों का उपयोग किया जाता है। यह एक जीवंत और रोचक दृश्य शैली बनाने में मदद करता है। कार्टून कला का एक लंबा इतिहास है। पुनर्जागरण काल में, कार्टूनों का उपयोग भित्तिचित्रों के तौर पर किया जाता था। 19वीं शताब्दी में, कार्टून शब्द का उपयोग पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में हास्यपूर्ण कलाकृतियों के लिए किया जाने लगा। वहीँ 20वीं सदी की शुरुआत में, कार्टूनों का उपयोग एनिमेटेड फिल्मों के लिए किया जाने लगा। आज, कार्टून कला का उपयोग मनोरंजन, शिक्षा, और सामाजिक और राजनीतिक आलोचना के लिए किया जाता है।

देश में कार्टून कला के क्षेत्र में एक जाना माना नाम है माधव बाजपेई जी का। आज इनका जन्मदिन है। इनके जन्मदिन पर आइए इनके बारे में विस्तार से जानते हैं। माधव विगत 35 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में वरिष्ठ कार्टूनिस्ट की भूमिका बख़ूबी निभा रहे हैं और समय समय कार्टून कला के लिए जागरूकता संबंधित कार्यक्रमों में भी शामिल होते रहते हैं। इनका जितना कार्टून कला में दख़ल हैं उतना ही काव्य और साहित्य में भी है।

वैसे आपका पूरा नाम हरिमोहन वाजपेयी “माधव” है, वे रायबरेली उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। 32 सालों से प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक समाचार पत्र राष्ट्रीय सहारा में वरिष्ठ कार्टूनिस्ट, कला विभाग व फोटोग्राफी विभाग के प्रबंधन की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। साथ ही अन्य अभिरुचि-साहित्यिक समीक्षा, संपादन व उर्दू ,अंग्रेजी साहित्य का अनुवाद, कविता, कहानी, बाल कहानी, स्मृति चित्र आदि के साथ-साथ लेखन, मंचीय काव्य पाठ व संचालन का भी कार्य करते रहते हैं। वे काव्यक्षेत्रे (साहित्यिक संस्था), लखनऊ के अध्यक्ष और साहित्यिक संस्था ‘सुन्दरम साहित्य संस्थान,लखनऊ के महासचिव भी हैं। इनकी कृतियां लघु उपन्यास ‘शहर में अपने’- 1988, ग़ज़ल संग्रह महकते ज़ज्बात -2020,कार्टून संग्रह कोरोनोलाजी इन कोविडटून्स 1992 से 1996 तक ‘राष्ट्रीय सहारा’ हिन्दी दैनिक के सभी संस्करणों में कुंडलियां छंद में राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक विषयों पर प्रतिदिन नियमित कॉलम का लेखन।

इन्हें प्रमुख सम्मान के रूप में महान कार्टूनिस्ट कांजीलाल शताब्दी समारोह 2010 में ‘कांजीलाल सम्मान’, धर्मवीर भारती पत्रकारिता सम्मान -2021, उत्तरप्रदेश सरकार राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान,उत्तर प्रदेश से ‘साहित्य गौरव सम्मान-2014, बैसवारा गौरव सम्मान ‘-2012, गोमती गौरव सम्मान-2016, तुलसी साहित्य गौरव ‘ सम्मान-2017,’साहित्य सुधाकर’ सम्मान, कवितालोक सृजन संस्थान,लखनऊ उत्तर प्रदेश ‘लालजी टंडन स्मृति सम्मान ‘2022, चेतना साहित्य रत्न सम्मान 2023,उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान -2023,राष्ट्रीय कवि संगम द्वारा “सारस्वत-सम्मान “-2023, मंगलम वीणापाणि शताब्दी सम्मानम-2024, प्रो. हरेन्द्र बहादुर सिंह स्मृति सम्मान 2024,सहित अनेक सम्मान प्राप्त हैं। साथ ही आकाशवाणी व दूरदर्शन लखनऊ और कई मंचों से कई बार काव्य पाठ एवं साक्षात्कारों का प्रसारण भी हुआ है।

 

– भूपेंद्र कुमार अस्थाना, लखनऊ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *