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पद्मश्री रणवीर सिंह बिष्ट (1928–1998) : 27वीं पुण्य तिथि पर विशेष
प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 1911 से स्थापित कला महाविद्यालय का अपना गौरवपूर्ण इतिहास रहा है। इस कला महाविद्यालय से एक से एक दिग्गज कलाकारों ने शिक्षा ली और देश विदेशों में अपनी कला का परचम लहराया और आज भी लहरा रहे हैं। आशा है कि यह परंपरा आगे भी जारी रहेगी। इसी महाविद्यालय के एक छात्र, शिक्षक, प्राचार्य और एक कलाकार रहे रणवीर सिंह बिष्ट जी।
भारतीय आधुनिक कला जगत में पद्मश्री रणवीर सिंह बिष्ट का नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। वे ऐसे चित्रकार थे जिन्होंने चित्रकला को केवल दृश्य-सौंदर्य या सजावट तक सीमित न रखकर उसे मानवीय पीड़ा, सामाजिक यथार्थ और आध्यात्मिक गहराई के माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया। उनकी कला में संवेदनशीलता और प्रतीकात्मकता का अनूठा संगम दिखाई देता है, जो दर्शक को केवल देखने नहीं, बल्कि सोचने, महसूस करने और आत्मचिंतन की ओर ले जाने का अनुभव कराता है। बिष्ट का व्यक्तित्व उतना ही गहन, अनुशासित और विचारशील था जितनी उनकी कला, और यही कारण है कि उन्हें भारतीय आधुनिक कला के प्रमुख स्तंभों में गिना जाता है।

कलाकार स्मृति शृंखला के अंतर्गत मैं आज रणवीर सिंह बिष्ट के 27वीं पुण्य तिथि पर याद करते हुए अपनी भावनाओं को साझा कर रहा हूँ । रणवीर सिंह बिष्ट का जन्म उत्तराखंड के लैंसडौन में 4 अक्टूबर 1928 को हुआ। उनका बाल्यकाल प्राकृतिक सुंदरता और पहाड़ी संस्कृति के बीच बीता, जिसने उनके भीतर लोक-जीवन और मानव-संवेदना की गहरी समझ पैदा की। इस सांस्कृतिक पृष्ठभूमि ने उनकी कला में स्थायी आत्मीयता और जीवन के प्रति संवेदनशील दृष्टि का आधार तैयार किया। आगे चलकर उन्होंने लखनऊ के गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स से फाइन आर्ट्स में पाँच वर्षीय डिप्लोमा (1954) पूरा किया। अकादमिक शिक्षा ने उन्हें तकनीकी दृढ़ता, अनुशासन और शास्त्रीय प्रशिक्षण दिया, जबकि पहाड़ों की स्मृतियाँ उनके कार्यों में जीवन्तता और भावनात्मक गहराई के स्रोत बनीं। इस प्रकार उनके व्यक्तित्व और कला में लोक-तत्व और आधुनिक अकादमिक दृष्टि का अद्भुत मेल दिखाई देता है।

1960 के दशक में बिष्ट की बौद्धिक और कलात्मक संवेदनशीलता लखनऊ कॉफी हाउस संस्कृति के वातावरण में विकसित हुई। वे न केवल एक शिक्षित और तकनीकी दृष्टि से सक्षम कलाकार थे, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक रूप से भी जागरूक थे। उनकी कला में भीतर की बेचैनी, समाज की असमानताओं और मानव जीवन की जटिलताओं के प्रति उनकी गहरी समझ दिखाई देती थी। उनका छोटा और मजबूत कद उनके दृढ़ इच्छाशक्ति और कला तथा सामाजिक मुद्दों पर अडिग विश्वास का प्रतीक था।
रणवीर सिंह बिष्ट की कला-दृष्टि संवेदनशील और प्रतीकात्मक रही। उनके चित्रों में मानव आकृतियाँ केवल भौतिक रूप में नहीं, बल्कि मनुष्य की आंतरिक अवस्थाओं, संघर्षों और अस्तित्वगत संकटों की अभिव्यक्ति के रूप में उभरती हैं। उनकी रेखाएँ गहरी, सारगर्भित और सांकेतिक होती थीं, जो कथ्य को प्रभावशाली रूप से आकार देती थीं। रंगों के प्रयोग में उनका दृष्टिकोण अत्यंत संवेदनशील था। नीले, भूरे, लाल और हरे रंगों का चयन उन्होंने केवल सौंदर्य के लिए नहीं, बल्कि भावनाओं, रहस्य, संघर्ष, पीड़ा और शांति जैसी अवस्थाओं को चित्रित करने के लिए किया। उनके लिए रंग भावनाओं की भाषा थी, जो सीधे दर्शक के मन से संवाद करती थी।

बिष्ट की कला-यात्रा विभिन्न श्रृंखलाओं में दिखाई देती है, जिनमें प्रत्येक श्रृंखला मानवीय, सामाजिक और आध्यात्मिक अनुभवों की अलग अभिव्यक्ति प्रस्तुत करती है-
1.Blue Series: नीले रंग की विविधता के माध्यम से रहस्य, ध्यान और आत्मविश्लेषण का प्रतीक।
2.Lust Series: लाल और मिट्टी रंगों के माध्यम से इच्छाओं, तनाव और मानवीय उथल-पुथल का चित्रण।
3.Headless Series: सिरविहीन आकृतियाँ आधुनिक समाज में पहचान और विवेक-संकट की प्रतीक।
4.Unwanted Series: उपेक्षित वर्गों और समाज की असमानताओं को उजागर करती है।
5.Nilavarni Series: आध्यात्मिकता, शांति, मौन और ध्यान का अनुभव रचती है।
6.Benaras Steps (वॉटरकलर): भारतीय परिदृश्य और सांस्कृतिक जुड़ाव को सहज और जीवन्त रूप में प्रस्तुत करती है।

1968 से 1989 तक लखनऊ कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स के 10वें प्राचार्य के रूप में बिष्ट ने कला-शिक्षा में नई दृष्टि दी। वे विद्यार्थियों को यह सिखाते थे कि कला का मूल आधार केवल तकनीक नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और आत्मानुभूति है। उनकी कक्षाएँ केवल अभ्यास का स्थान नहीं थीं, बल्कि प्रयोग, चिंतन और विचार-विमर्श का केंद्र थीं। उनके शिष्य उन्हें आज भी संवेदनशील गुरु और मार्गदर्शक के रूप में याद करते हैं, जिन्होंने कला को जीवन और समाज से जोड़ना सिखाया।
समीक्षकों की दृष्टि से बिष्ट की कला में भारतीयता और आधुनिकता का विलक्षण संगम दिखाई देता है। Blue और Nilavarni श्रृंखलाएँ शांति, ध्यान और ब्रह्मांडीय सामंजस्य का प्रतीक हैं, जबकि Lust और Unwanted श्रृंखलाएँ समाज की पीड़ा और टूटन को उद्घाटित करती हैं। विशेषकर Headless Series दर्शक को असहज बनाते हुए गहन आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती हैं। उनकी कला की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि यह केवल देखने का अनुभव नहीं कराती, बल्कि सोचने और महसूस करने का अवसर देती है।

उनकी उपलब्धियों के लिए भारत सरकार के तत्कालीन राष्ट्रपति आर. वेंकट रमन के द्वारा पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया गया । इसके अतिरिक्त, वे ललित कला अकादमी सहित कई प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा भी सम्मानित किए गए। उनकी कृतियाँ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में प्रदर्शित हुईं और कला-समालोचकों तथा दर्शकों से अत्यधिक सराही गईं। उनकी कला ने न केवल भारतीय परंपरा और आधुनिकता को जोड़ा, बल्कि इसे वैश्विक कला-परिप्रेक्ष्य में भी महत्वपूर्ण स्थान दिलाया। 25 सितंबर 1998 को बिष्ट का निधन हो गया था।
पद्मश्री रणवीर सिंह बिष्ट की कला यह संदेश देती है कि कलाकार का कार्य केवल चित्र बनाना नहीं, बल्कि समाज और आत्मा का दर्पण प्रस्तुत करना है। उन्होंने परंपरा और आधुनिकता, शांति और संघर्ष, रूप और विचार—सभी को एक ही कैनवास पर साधा। उनकी कृतियाँ आज भी दर्शकों को यह अनुभव कराती हैं कि कला का वास्तविक उद्देश्य है मनुष्य और समाज की आत्मा को छूना तथा उसे संवेदनशील बनाना। यही उनकी स्थायी विरासत और अमरत्व है। उनके कार्य भारतीय और वैश्विक कला जगत में आज भी अत्यंत प्रभावशाली और प्रेरणादायक बने हुए हैं।
– भूपेंद्र कुमार अस्थाना
25 सितंबर 2025
