“पर्दे के पार : रंगमंच की साधना, शतक का उत्सव और दो पीढ़ियों का संवाद”

रंगमंच का शतक : अनिल रस्तोगी और मुस्कान गोस्वामी के साझा सृजन की ऐतिहासिक संधि पिछले दिनों लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी का …

कला और कैदी: रचनात्मक पुनर्वास के माध्यम से सुधार की एक नई राह

जेल को सामान्यतः दंड और अलगाव के स्थान के रूप में देखा जाता है। हालांकि, आधुनिक अपराध विज्ञान (Criminology) अब ‘दंडात्मक सुधार’ से आगे बढ़कर …

कोशी : ‘बिहार का शोक’ नहीं, ऐतिहासिक समृद्धि की नदी

कोशी अंचल से मजदूरों का पलायन: विकास-विफलता का दर्पण बिहार का कोशी अंचल लंबे समय से श्रमिक पलायन की त्रासदी झेल रहा है। सहरसा, सुपौल, …

विंसेंट वान गॉग के फ़लक पर तैरती काफ्काई दुनिया और भटकते मुक्तिबोध के शब्द-चित्र   

डॉ. अन्नपूर्णा शुक्ला एक प्रतिष्ठित कलाकार, कला लेखक एवं शिक्षाविद् हैं। वे वनस्थली विद्यापीठ में प्राध्यापक के रूप में कार्यरत रहीं, जहाँ उन्होंने कला शिक्षा …

युद्ध और कला

युद्ध-विरोध को प्रत्यक्ष या प्रतीकात्मक रूप से व्यक्त करने के उद्देश्य से कलाकारों ने जो चित्र रचे, उनमें से कुछ सर्वकालिक महान कलाकृति बन गयी …

भारतीय कला-परंपरा : औपनिवेशिक दृष्टिकोण और प्रतिकार

भारतीय कला-परंपरा पर औपनिवेशिक काल में पश्चिमी विद्वानों की दृष्टि दो विपरीत ध्रुवों के बीच झूलती रही—एक ओर रोमांटिक, सराहनात्मक और ओरिएंटलिस्ट प्रशंसा, तो दूसरी …

युद्ध, सृजन और मृत्यु : कलाकारों की बटालियन की त्रासदी

शैलजा आर्ट गैलरी, गुडगाँव में 15 नवम्बर को आयोजित एक कार्यक्रम में वरिष्ठ चित्रकार /कला समीक्षक अशोक भौमिक द्वारा “हाउ टू सी” व्याख्यान श्रृंखला की …

कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में नेहरू का योगदान

आजाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु अपने जीवनकाल में बच्चों के बीच चाचा नेहरु के रूप में जाने जाते थे I इन्हीं वजहों से …