उत्तर प्रदेश की छापा कला परंपरा : विरासत की निरंतरता

भूपेन्द्र कुमार अस्थाना समकालीन भारतीय कला जगत के एक सक्रिय और बहुआयामी युवा कलाकार हैं, जिनकी रचनात्मक उपस्थिति केवल चित्र सृजन तक सीमित नहीं है, …

ऋषि-परंपरा से राष्ट्रग्रंथ तक: भारतीय संविधान की कलात्मक आत्मा

डॉ. अन्नपूर्णा शुक्ला समकालीन भारतीय कला जगत की एक प्रतिष्ठित वरिष्ठ चित्रकार हैं, जिन्होंने न केवल अपने चित्रों के माध्यम से बल्कि अपनी लेखनी द्वारा …

स्मृतियों का आलोक : नन्द किशोर खन्ना को श्रद्धांजलि

21 मार्च 2026 को वरिष्ठ कलाकार, कला समीक्षक एवं शिक्षाविद् नन्द किशोर खन्ना जी की 9वीं पुण्यतिथि एक गहन स्मृति और आत्मीय श्रद्धांजलि का अवसर …

दीवारों से दीर्घा तक : स्टेंसिल, स्मृति और राजनीति का पुनर्पाठ

पिछली सदी के सत्तर के दशक की स्मृतियों में लौटें तो चुनाव प्रचार का एक विशिष्ट दृश्य सामने आता है, जब टीन की चादरों पर …

अफगानिस्तान में  मिला हज़ार वर्ष पुराना बौद्ध मठ, पुस्तकालय और कक्ष भी 

अफगानिस्तान के दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र में हाल ही में एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोज सामने आई है। प्रारंभिक सूचनाओं के अनुसार, यहाँ लगभग एक हज़ार वर्ष …

टिकुली पेंटिंग : परंपरा से आधुनिक कला तक की रचनात्मक यात्रा

बिहार में प्रचलित टिकुली पेंटिंग एक ऐसी विशिष्ट लोक–कला परंपरा है, जिसकी जड़ें भारतीय सांस्कृतिक इतिहास में गहराई तक समाई हुई हैं। इसका संबंध केवल …

युद्ध और उन्माद के साये में मनुष्यता की पुकार

प्रो. वी. नागदास की पहचान एक कलागुरु के साथ-साथ वरिष्ठ चित्रकार और छापा कलाकार की है I शायद यही कारण रहा कि ललित कला अकादेमी …

आम आदमी को चित्रकला के केंद्र मे लाने वाली शैली है ‘पटना कलम’

अठारहवीं सदी में पटना एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र के रूप में प्रसिद्ध था। इसी दौर में यहाँ जिस विशिष्ट चित्रकला शैली का विकास हुआ, उसे …

क्यूबा को गांधी का देश मानते थे सच्चिदानंद सिन्हा : अनीश अंकुर

सच्चिदानंद सिन्हा एक प्रमुख लेखक, चिंतक और वैकल्पिक विकास-दृष्टि के समर्थक थे। वे सामाजिक न्याय, समता और मनुष्य-केंद्रित विकास के प्रश्नों पर गहन चिंतन के …