भारतीय कला आलोचना: परंपरा, संक्रमण और समकालीन विमर्श

भारतीय कला आलोचना का इतिहास एक जटिल, बहुआयामी और विचारशील यात्रा है, जो शास्त्रीय युग की सूक्ष्म सौंदर्य दृष्टियों से लेकर समकालीन समाज-सांस्कृतिक विमर्शों तक …

पद्मश्री प्रोफेसर रणबीर सिंह बिष्ट (1928-1998)

जन्मतिथि पर विशेष (4 अक्टूबर, 1928-1998) यह आम अवधारणा है कि किसी भी कलाकार के कृतित्व का सही मूल्यांकन समय ही करता है। कितने ही …

आचार्य मदनलाल नागर के जन्मशती वर्ष में एक पुनरावलोकन

साधारण से असाधारण की ओर जीवनपरयंत अग्रसर रहे कलासाधक आचार्य मदनलाल नागर की जन्मशती वर्ष में उनकी स्मृतियों का स्मरण करते हुए उनके सृजन काल …

इतिहास के बिना गूंगी है कला : जोनी एमएल

अंग्रेजी में प्रकाशित होनेवाली कला पत्रिका “क्रिएटिव माइंड” के प्रबंध संपादक मनोज त्रिपाठी ने वरिष्ठ कला समीक्षक, कला इतिहासकार और क्यूरेटर, जोनी एमएल से बातचीत …

प्रोफ़ेसर बद्रीनाथ आर्या : कहे अनकहे तथ्य…

प्रो. जय कृष्ण अग्रवाल सर की पहचान एक कलाविद, भूतपूर्व प्राचार्य, छायाकार एवं देश के शुरुआती और शीर्षस्थ प्रिंट मेकर वाली है। किन्तु जितनी बार …