बात इंडिया आर्ट फ़ेयर का 17वाँ संस्करण Posted onFebruary 5, 2026February 5, 2026 इंडिया आर्ट फ़ेयर के 17वें संस्करण का आज पहला दिन था । वरिष्ठ कला समीक्षक और क्यूरेटर जोनी एमएल की नज़र में इस बार का …
बात कला दीर्घा और गोदाम के अंतर को समझना होगा Posted onJanuary 31, 2026January 31, 2026 जब कोई कला प्रेमी दर्शक किसी कला-प्रदर्शनी में जाता है, तो उसकी यह स्वाभाविक अपेक्षा होती है कि वह एक सुविचारित और संतोषजनक प्रदर्शनी का …
बात बहु-विषयक कला या अर्थहीन स्वतंत्रता? Posted onJanuary 25, 2026January 25, 2026 जोनी एम. एल. भारतीय समकालीन कला जगत के एक प्रमुख कला समीक्षक, लेखक और क्यूरेटर हैं। वे तीखे, निर्भीक और वैचारिक रूप से स्पष्ट लेखन …
पुरातत्व पीर पंजाल क्षेत्र के घुड़सवार मूर्तिशिल्प Posted onJanuary 24, 2026January 24, 2026 फेसबुक पर एक पोस्ट से जानकारी मिली कि जम्मू के रामबन इलाके में स्थित गुल इलाके में एक स्थान है घोड़ा गली, जहाँ पत्थर में …
बात माता सरस्वती: कला की देवी? Posted onJanuary 22, 2026January 22, 2026 भारतीय कला-संस्कृति में माता सरस्वती का नाम आते ही सामान्यतः विद्या, वाणी और ज्ञान का बोध होता है। लेकिन क्या सरस्वती को कला की देवी …
कला दीर्घा अनिरुल इस्लाम की “एथेरियल थ्रेशहोल्ड” यानी अलौकिक दहलीज Posted onJanuary 20, 2026January 20, 2026 ‘एथेरियल थ्रेशहोल्ड’ शीर्षक थोड़ा-सा भ्रामक है; यह हमें ‘दहलीज के उस पार’ की अस्पष्टता की ओर आमंत्रित करता है। जाहिर है इसमें कुछ अयथार्थ (irreal) …
बात परंपरा और समयबोध के बीच : लोक व जनजातीय कला की समकालीन पहचान Posted onJanuary 19, 2026January 19, 2026 “लोक और जनजातीय कलाएँ भी समकालीन कला हो सकती हैं, लेकिन इसे समझने के लिए “समकालीन” शब्द का अर्थ समझना ज़रूरी है। समकालीन कला का …
साक्षात्कार ‘मुठ्ठी से झरती रेत कहती है कि समय कम है..रोज रचो.. नया रचो’: सुदर्शन पटनायक Posted onDecember 12, 2025December 12, 2025 जयंत सिंह तोमर समकालीन भारतीय कला लेखन के उन संवेदनशील नामों में से हैं जिन्होंने कला को केवल दृश्य अनुभव नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संवाद और …
कला इतिहास युद्ध और कला Posted onDecember 1, 2025December 1, 2025 युद्ध-विरोध को प्रत्यक्ष या प्रतीकात्मक रूप से व्यक्त करने के उद्देश्य से कलाकारों ने जो चित्र रचे, उनमें से कुछ सर्वकालिक महान कलाकृति बन गयी …
कला इतिहास भारतीय कला-परंपरा : औपनिवेशिक दृष्टिकोण और प्रतिकार Posted onNovember 27, 2025November 27, 2025 भारतीय कला-परंपरा पर औपनिवेशिक काल में पश्चिमी विद्वानों की दृष्टि दो विपरीत ध्रुवों के बीच झूलती रही—एक ओर रोमांटिक, सराहनात्मक और ओरिएंटलिस्ट प्रशंसा, तो दूसरी …