युद्ध और कला

युद्ध-विरोध को प्रत्यक्ष या प्रतीकात्मक रूप से व्यक्त करने के उद्देश्य से कलाकारों ने जो चित्र रचे, उनमें से कुछ सर्वकालिक महान कलाकृति बन गयी …

भारतीय कला-परंपरा : औपनिवेशिक दृष्टिकोण और प्रतिकार

भारतीय कला-परंपरा पर औपनिवेशिक काल में पश्चिमी विद्वानों की दृष्टि दो विपरीत ध्रुवों के बीच झूलती रही—एक ओर रोमांटिक, सराहनात्मक और ओरिएंटलिस्ट प्रशंसा, तो दूसरी …

स्पेक्ट्रम आर्ट फेयर 2025 —एक अद्भुत कला यात्रा

“रंग–संवाद का महाकुंभ” लखनऊ स्पेक्ट्रम आर्ट फेयर 2025 का सफल समापन 25 नवंबर को हुआ। इन 25 दिनों में लगभग 20,000 दर्शकों ने इस भव्य …

गुस्ताव क्लिम्ट की “पोर्ट्रेट ऑफ़ एलिजाबेथ लेडेरर”

गुस्ताव क्लिम्ट की पेंटिंग, “Portrait of Elisabeth Lederer” (1914–1916), हाल ही में एक नीलामी में $236.4 मिलियन में बिकी, जिससे यह आधुनिक कला की नीलामी …

असीम लोक 

सीरज सक्सेना एक बहुमुखी भारतीय कलाकार हैं—चित्रकार, सेरामिक कलाकार और लेखक। उनकी रचनात्मक यात्रा रेखा, बनावट और रूप की संवेदनशील खोज से संचालित होती है। …

गुफा चित्रों की प्रेरणा, उद्देश्य और जादू-टोना की अवधारणा: एक विश्लेषण

प्रागैतिहासिक गुफा चित्र मानव सभ्यता के आरंभिक संवे‍दनात्मक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विकास के बुनियादी दस्तावेज माने जाते हैं। ये चित्र न केवल कलात्मक अभिव्यक्ति के …

बिहार म्यूजियम बिनाले – ग्लोबल साउथ: शेयर्ड हिस्ट्री-2

बिहार म्यूजियम बिनाले 2025, पटना में आयोजित, 7 अगस्त 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक चलने वाला एक प्रमुख कला-सांस्कृतिक समारोह है। इस तीसरे संस्करण …

संगीता कोडिमयाला : मिट्टी, स्मृति और संवेदना की चित्रभाषा

नई दिल्ली, 18 अक्टूबर। कल यानी शुक्रवार को कलाकार-मित्र त्रिभुवन देव के साथ ललित कला अकादमी की रवींद्र भवन दीर्घा जाना हुआ। इस दीर्घा से …

भारतीय लघुचित्र शैलियों में माँ दुर्गा के रूप-स्वरूप का चित्रण

आदरणीय नर्मदा प्रसाद उपाध्याय भारतीय कला इतिहास के प्रमुख विद्वानों में से हैं, जिन्होंने विशेष रूप से लघुचित्र शैली पर गहन शोध किया है। वे …