कला दीर्घा और गोदाम के अंतर को समझना होगा

जब कोई कला प्रेमी दर्शक किसी कला-प्रदर्शनी में जाता है, तो उसकी यह स्वाभाविक अपेक्षा होती है कि वह एक सुविचारित और संतोषजनक प्रदर्शनी का …

अनिरुल इस्लाम की “एथेरियल थ्रेशहोल्ड” यानी अलौकिक दहलीज

‘एथेरियल थ्रेशहोल्ड’ शीर्षक थोड़ा-सा भ्रामक है; यह हमें ‘दहलीज के उस पार’ की अस्पष्टता की ओर आमंत्रित करता है। जाहिर है इसमें कुछ अयथार्थ (irreal) …

परंपरा और समयबोध के बीच : लोक व जनजातीय कला की समकालीन पहचान

“लोक और जनजातीय कलाएँ भी समकालीन कला हो सकती हैं, लेकिन इसे समझने के लिए “समकालीन” शब्द का अर्थ समझना ज़रूरी है। समकालीन कला का …

‘मुठ्ठी से झरती रेत कहती है कि समय कम है..रोज रचो.. नया रचो’: सुदर्शन पटनायक

जयंत सिंह तोमर समकालीन भारतीय कला लेखन के उन संवेदनशील नामों में से हैं जिन्होंने कला को केवल दृश्य अनुभव नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संवाद और …

युद्ध और कला

युद्ध-विरोध को प्रत्यक्ष या प्रतीकात्मक रूप से व्यक्त करने के उद्देश्य से कलाकारों ने जो चित्र रचे, उनमें से कुछ सर्वकालिक महान कलाकृति बन गयी …

भारतीय कला-परंपरा : औपनिवेशिक दृष्टिकोण और प्रतिकार

भारतीय कला-परंपरा पर औपनिवेशिक काल में पश्चिमी विद्वानों की दृष्टि दो विपरीत ध्रुवों के बीच झूलती रही—एक ओर रोमांटिक, सराहनात्मक और ओरिएंटलिस्ट प्रशंसा, तो दूसरी …