राजधानी के कोलाहल में कला का शांत द्वीप : लखनऊ कला महाविद्यालय

लखनऊ कला महाविद्यालय का इतिहास अत्यंत स्वर्णिम, समृद्ध और गौरवपूर्ण रहा है। यहाँ का वातावरण केवल कलात्मक ही नहीं, बल्कि आत्मा को स्पर्श करने वाला …

जन्मशती विशेष: तैयब मेहता की कला में विभाजन, प्रतीक और सौंदर्य का प्रतिरोध

भारतीय आधुनिक चित्रकला के अग्रगण्य कलाकारों में तैयब मेहता (Tyeb Mehta) का नाम विशेष महत्व रखता है। आज उनकी जन्मशती के अवसर पर, यह स्मरण …

हर्बर्ट रीड की दृष्टि से हेनरी मूर की मूर्तिकला

कलाकार और कला समीक्षक के बीच संबंध अक्सर रचनात्मक संवाद और सौंदर्यशास्त्रीय मार्गदर्शन का माध्यम बनते हैं। इस संदर्भ में यदि किसी जोड़ी का नाम …

वेज़ ऑफ़ सीइंग: जॉन बर्जर की कलानुभूति

“Ways of Seeing” (जॉन बर्जर द्वारा, प्रथम प्रकाशन – 1972) एक अत्यंत प्रभावशाली कृति है, जिसकी शुरुआत BBC की एक टेलीविज़न शृंखला के रूप में …

चित्रकला के मौन साधक: रामचंद्र शुक्ल

भारतीय समकालीन चित्रकला के परिदृश्य में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जो बिना किसी आडंबर या प्रचार के अपनी विशिष्ट छाप छोड़ते हैं। रामचंद्र शुक्ल …

भारतीय कला आलोचना: परंपरा, संक्रमण और समकालीन विमर्श

भारतीय कला आलोचना का इतिहास एक जटिल, बहुआयामी और विचारशील यात्रा है, जो शास्त्रीय युग की सूक्ष्म सौंदर्य दृष्टियों से लेकर समकालीन समाज-सांस्कृतिक विमर्शों तक …

पोस्ट-मॉडर्न की धारणा: क्लेमेंट ग्रीनबर्ग की दृष्टि में

क्लेमेंट ग्रीनबर्ग 20वीं शताब्दी के एक प्रभावशाली कला समीक्षक थे। उन्होंने आधुनिक कला (Modern Art) को समझने और उसकी सीमाओं को तय करने में महत्वपूर्ण …

पुस्तकें पढ़कर पूरी करनी चाहिए या नहीं – मेरी पहली सीख

पुस्तकों को पढ़कर पूरी करनी चाहिए या नहीं – इस प्रश्न पर मेरी पहली सीख मुझे एम. कृष्णन नायर से मिली थी। वे एक ऐसे …