एक भेंट जिसने मेरा रास्ता ही बदल दिया…

रा.कला एवं शिल्प महाविद्यालय, लखनऊ 1957-62.   आदरणीय जयकृष्ण अग्रवाल उन चंद वरिष्ठ कलाकारों में से एक हैं, जिन्होंने आधुनिक कला में प्रिंटमेकिंग को अपनाया। …

चाचा मुहम्मद अली: मेरे प्रशिक्षण काल की स्मृतियां 1957-62.

किसी संस्थान का महत्व केवल उसके भवन और साजो सामान से निर्धारित नहीं किया जा सकता है। वास्तव में उसमें प्राण तो उससे जुड़े लोग …

‘दिनमान’ समाचार-साप्ताहिक

जय कृष्ण अग्रवाल सर की पहचान एक कलाविद, भूतपूर्व प्राचार्य, छायाकार एवं देश के शुरुआती और शीर्षस्थ प्रिंट मेकर वाली है। किन्तु जितनी बार भी …

कलागुरू नित्यानंद महापात्रा जी के लीनोकट…

अनेक कलाकार जीवन भर कला साधना में अपना सर्वस्व समर्पित कर देते हैं किन्तु उनके जाने के बाद रह जातीं है शेष केवल स्मृतियाँ। उत्तर …

राबिया ज़ुबैरी (1939-2022 )

भूतपूर्व छात्रा, कला एवं शिल्प महाविद्यालय,लखनऊ कुछ संस्मरण…   राजकीय कला एवं शिल्प महाविद्यालय, लखनऊ में प्रशिक्षित अनेक कलाकारों ने अपनी सृजनात्मक उपलब्धियों से विशिष्ट …

जैविक से यांत्रिक के बीच सृजनात्मक सामंजस्य: डाक्टर शोभित चावला

कितना विचित्र लगता है यदि किसी सामान्य व्यक्ति से कहा जाए कि क्या तुम्हें दीखता नहीं है, किन्तु यह सच है अक्सर लोग बहुत कुछ …

मुहम्मद हनीफ : मिट्टी में जीवन खोजते यथार्थवादी मूर्तिकार…

अत्यंत शांत, सौहार्द्र और सहिष्णु व्यक्तित्व के कलाकार हनीफ साहब को लगता है वख्त ने जैसे भुला ही दिया। यथार्थवादी शिल्पकार और संगतराश हिरण्मय राय …

कुछ विशिष्ट् छात्रों से जुड़ी स्मृतियाँ : संदीप भाटिया

प्रो. जयकृष्ण अग्रवाल जी उन वरिष्ठ कलाकारों में से हैं, जो लगभग नियमित तौर पर सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं। उनके लेखन का दायरा …

बीते दिनों की कुछ यादें: लखनऊ सन् 1957-58.

 मेरे फोटो एलबम से… प्रो. जयकृष्ण अग्रवाल जी उन वरिष्ठ कलाकारों में से हैं, जो लगभग नियमित तौर पर सोशल मिडिया पर सक्रिय रहते हैं। …