सोहराई कला : प्रकृति और संस्कृति का संगम है

पांच दिवसीय पारंपरिक आदिवासी सोहराई कला कार्यशाला का समापन कार्यशाला में निर्मित कलाकृतियों की प्रदर्शनी के साथ। लखनऊ, 23 अगस्त 2025 I  भारत की आदिवासी …

कोहबर : महज़ एक कला रूप ही नहीं नारीत्व और जीवन का उत्सव भी है

 परंपरा और रचनात्मकता का उत्सव: छात्रों के लिए आयोजित पाँच दिवसीय कोहबर कला कार्यशाला का समापन । लखनऊ, 26 जुलाई I 22 से 26 जुलाई …

उत्तर प्रदेश के लोकचित्रों को पहचान अवश्य मिलनी चाहिए : कुमुद सिंह

कला के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश को एक बेहतर कल के लिए तैयार करना है – नेहा सिंह नई पीढ़ी में कलात्मक संवेदनशीलता और सांस्कृतिक …

बिहार में प्रदर्शित होगी उत्तर प्रदेश के कलाकारों की भोजपुरी शैली की कलाकृतियाँ

 उत्तर प्रदेश की दो लोककलाकार कुमुद सिंह और वंदना श्रीवास्तव के दो-दो  भोजपुरी शैली की कृतियाँ  कार्यक्रम में भाग लेंगे भूपेंद्र अस्थाना, कुमुद सिंह और …

लोक कलाओं में लोक मंगल के भाव

पी.राज.सिंह यानी पृथ्वीराज सिंह यूं तो अंग्रेजी के व्याख्याता रहे हैं। किन्तु भोजपुरी भाषा के विकास और लोक कलाओं व लोकाचारों के संरक्षण के भी …